ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5757.1वाल्मीकि रामायण 57.1राक्षसम् मृग रूपेण चरन्तम् काम रूपिणम् । निहत्य रामो मारीचम् तूर्णम् पथि न्यवर्तत ॥३-५७-१॥अगलापूरा अध्याय