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वाल्मीकि रामायण 56.35

शोकेन महता ग्रस्ता मैथिली जनकात्मजा ।
न शर्म लभते भीरुः पाश बद्धा मृगी यथा ॥३-५६-३५॥

पूरा अध्याय