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वाल्मीकि रामायण 56.32

इति प्रति समादिष्टा राक्षस्यो रावणेन ताः ।
अशोक वनिकाम् जग्मुः मैथिलीम् परिगृह्य तु ॥३-५६-३२॥

पूरा अध्याय