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वाल्मीकि रामायण 56.23

रावणम् मैथिली तत्र पुनः न उवाच किंचन ।
सीताया वचनम् श्रुत्वा परुषम् रोम हर्षणम् ॥३-५६-२३॥

पूरा अध्याय