ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5656.18वाल्मीकि रामायण 56.18न शक्या यज्ञ मध्यस्था वेदिः स्रुक् भाण्ड मण्डिता । द्विजाति मंत्र संपूता चण्डालेन अवमर्दितुम् ॥३-५६-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय