ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5555.4वाल्मीकि रामायण 55.4अश्रु पूर्ण मुखीम् दीनाम् शोक भार अवपीडिताम् । वायु वेगैः इव आक्रांताम् मज्जन्तीम् नावम् अर्णवे ॥३-५५-४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय