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वाल्मीकि रामायण 55.2

स चिंतयानो वैदेहीम् काम बाण संप्रपीडितः ।
प्रविवेश गृहम् रम्यम् सीताम् द्रष्टुम् अभित्वरन् ॥३-५५-२॥

पूरा अध्याय