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वाल्मीकि रामायण 54.9

सरिताम् शरणम् गत्वा समतीयाय सागरम् ।
संभ्रमात् परिवृत्त ऊर्मी रुद्ध मीन महोरगः ॥३-५४-९॥

पूरा अध्याय