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वाल्मीकि रामायण 54.1

ह्रियमाणा तु वैदेही कंचित् नाथम् अपश्यती ।
ददर्श गिरि शृंगस्थान् पंच वानर पुंगवान् ॥३-५४-१॥

पूरा अध्याय