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वाल्मीकि रामायण 52.14

तप्त आभरण वर्ण अन्गी पीत कौशेय वासनी ।
रराज राज पुत्री तु विद्युत् सौदामनी यथा ॥३-५२-१४॥

पूरा अध्याय