ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5252.1वाल्मीकि रामायण 52.1सा तु तारा अधिप मुखी रावणेन निरीक्ष्य तम् । गृध्र राजम् विनिहतम् विललाप सुदुःखिता ॥३-५२-१॥अगलापूरा अध्याय