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वाल्मीकि रामायण 51.36

स तथा गृध्र राजेन क्लिश्यमानो मुहुर् मुहुः ।
अमर्ष स्फुरित ओष्ठः सन् प्राकंपत स राक्षसः ॥३-५१-३६॥

पूरा अध्याय