Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 51.29

यथा त्वया कृतम् कर्म भीरुणा लोक गर्हितम् ।
तस्कर आचरितो मार्गो न एष वीर निषेवितः ॥३-५१-२९॥

पूरा अध्याय