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वाल्मीकि रामायण 51.22

तम् प्रहृष्टम् निधाय अंके रावणम् जनक आत्मजाम् ।
गच्छंतम् खड्ग शेषम् च प्रणष्ट हत साधनम् ॥३-५१-२२॥

पूरा अध्याय