ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 5050.7वाल्मीकि रामायण 50.7रक्षणीया विशेषेण राज दारा महाबलः । निवर्तय गतिम् नीचाम् पर दार अभिमर्शनात् ॥३-५०-७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय