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वाल्मीकि रामायण 5.6

असंस्पृशन्तम् वसुधाम् ददर्श विबुध ईश्वरम् ।
संप्रभ आभरणम् देवम् विरजो अंबर धारिणम् ॥३-५-६॥

पूरा अध्याय