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वाल्मीकि रामायण 5.43

स पुण्य कर्मा भुवने द्विजर्षभःपितामहम् सानुचरम् ददर्श ह ।
पितामहः च अपि समीक्ष्य तम् द्विजम्ननन्द सुस्वागतम् इति उवाच ह ॥३-५-४३॥

पूरा अध्याय