ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 55.24वाल्मीकि रामायण 5.24अथ वज्री तम् आमंत्र्य मानयित्वा च तापसम् । रथेन हय युक्तेन ययौ दिवम् अरिन्दमः ॥३-५-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय