ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 55.13वाल्मीकि रामायण 5.13अर्चिष्मन्तम् श्रिया जुष्टम् अद्भुतम् पश्य लक्ष्मण । प्रतपन्तम् इव आदित्यम् अन्तरिक्ष गतम् रथम् ॥३-५-१३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय