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वाल्मीकि रामायण 5.11

अन्तरिक्ष गतम् देवम् गीर्भिर् अग्र्याभिर् ऐडियन् ।
सह संभाषमाणे तु शरभंगेन वासवे ॥३-५-११॥

पूरा अध्याय