ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4848.17वाल्मीकि रामायण 48.17सर्व राक्षस भर्तारम् कामय - कामात् - स्वयम् आगतम् । न मन्मथ शर आविष्टम् प्रति आख्यातुम् त्वम् अर्हसि ॥३-४८-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय