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वाल्मीकि रामायण 47.4

उषित्वा द्वा दश समाः इक्ष्वाकूणाम् निवेशने ।
भुंजाना मानुषान् भोगान् सर्व काम समृद्धिनी ॥३-४७-४॥

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