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वाल्मीकि रामायण 47.22

विचराम द्विज श्रेष्ठ वनम् गंभीरम् ओजसा ।
समाश्वस मुहूर्तम् तु शक्यम् वस्तुम् इह त्वया ॥३-४७-२२॥

पूरा अध्याय