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वाल्मीकि रामायण 47.15

भरताय प्रदातव्यम् इदम् राज्यम् अकण्टकम् ।
त्वया तु खलु वस्तव्यम् नव वर्षाणि पंच च ॥३-४७-१५॥

पूरा अध्याय