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वाल्मीकि रामायण 47.10

अयाचत अर्थैः अन्वर्थैः न च यांचाम् चकार सा ।
मम भर्ता महातेजा वयसा पंच विंशकः ॥३-४७-१०॥

पूरा अध्याय