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वाल्मीकि रामायण 47.1

रावणेन तु वैदेही तदा पृष्टा जिहीर्षुणा ।
परिव्राजक रूपेण शशंस आत्मानम् आत्मना ॥३-४७-१॥

पूरा अध्याय