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वाल्मीकि रामायण 46.32

एका चरसि कल्याणि घोरान् राक्षस सेवितान् ।
इति प्रशस्ता वैदेही रावणेन दुरात्मना - महात्मना- ॥३-४६-३२॥

पूरा अध्याय