ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4646.22वाल्मीकि रामायण 46.22करान्तमित मध्या असि सुकेशी संहत स्तनी । न एव देवी न गन्धर्वी न यक्षी न च किंनरी ॥३-४६-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय