ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4646.20वाल्मीकि रामायण 46.20पीन उन्नत मुखौ कान्तौ स्निग्ध ताल फल उपमौ । मणि प्रवेक आभरणौ रुचिरौ ते पयो धरौ ॥३-४६-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय