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वाल्मीकि रामायण 46.14

दृष्ट्वा काम शर आविद्धो ब्रह्म घोषम् उदीरयन् ।
अब्रवीत् प्रश्रितम् वाक्यम् रहिते राक्षस अधिपः ॥३-४६-१४॥

पूरा अध्याय