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वाल्मीकि रामायण 46.12

शुभाम् रुचिर दन्त ओष्ठीम् पूर्ण चन्द्र निभ आननाम् ।
आसीनाम् पर्णशालायाम् बाष्प शोक अभिपीडिताम् ॥३-४६-१२॥

पूरा अध्याय