ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4545.36वाल्मीकि रामायण 45.36गोदावरीम् प्रवेक्ष्यामि हीना रामेण लक्ष्मण । आबन्धिष्ये अथवा त्यक्ष्ये विषमे देहम् आत्मनः ॥३-४५-३६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय