ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 4343.9वाल्मीकि रामायण 43.9एवम् ब्रुवाणम् काकुत्स्थम् प्रतिवार्य शुचि स्मिता । उवाच सीता संहृष्टा चद्मना हृत चेतना ॥३-४३-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय