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वाल्मीकि रामायण 43.39

एतेन हि नृशंसेन मारीचेन अकृत आत्मना ।
वने विचरता पूर्वम् हिंसिता मुनि पुंगवाः ॥३-४३-३९॥

पूरा अध्याय