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वाल्मीकि रामायण 42.20

वनम् प्रज्वलयन् रम्यम् राम आश्रम पदम् च तत् ।
मनोहरम् दर्शनीयम् रूपम् कृत्वा स राक्षसः ॥३-४२-२०॥

पूरा अध्याय