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वाल्मीकि रामायण 41.20

निवार्यमाणः तु मया हित एषिणान मृष्यसे वाक्यम् इदम् निशाचर ।
परेत कल्पा हि गत आयुषो नराहितम् न गृह्णन्ति सुहृद्भिः ईरितम् ॥३-४१-२०॥

पूरा अध्याय