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वाल्मीकि रामायण 41.14

स्वामिना प्रतिकूलेन प्रजाः तीक्ष्णेन रावण ।
रक्ष्यमाणा न वर्धन्ते मेषा गोमायुना यथा ॥३-४१-१४॥

पूरा अध्याय