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वाल्मीकि रामायण 40.15

अभ्यागतम् माम् दौरात्म्यात् परुषम् वदसि ईदृशम् ।
गुण दोषौ न पृच्छामि क्षमम् च आत्मनि राक्षस ॥३-४०-१५॥

पूरा अध्याय