ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 44.6वाल्मीकि रामायण 4.6सः भग्न बहुः संविग्नः पपात आशु विमूर्छितः । धरण्याम् मेघ संकाशो वज्र भिन्न इव अचलः ॥३-४-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय