ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 44.18वाल्मीकि रामायण 4.18तदा प्रकृतिम् आपन्नो भवान् स्वर्गम् गमिष्यति । अनुपस्थीयमानो माम् स क्रुद्धो व्याजहार ह ॥३-४-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय