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वाल्मीकि रामायण 38.33

निवार्यमाणः सुहृदा मया भृशम्प्रसह्य सीताम् यदि धर्षयिष्यसि ।
गमिष्यसि क्षीण बलः स बान्धवोयम क्षयम् राम शर आत्त जीवितः ॥३-३८-३३॥

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