ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3838.29वाल्मीकि रामायण 38.29शर जाल परिक्षिप्ताम् अग्नि ज्वाला समावृताम् । प्रदग्ध भवनाम् लंकाम् द्रक्ष्यसि त्वम् असंशयम् ॥३-३८-२९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय