ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3838.2वाल्मीकि रामायण 38.2नील जीमूत संकाशः तप्त कांचन कुण्डलः । भयम् लोकस्य जनयन् किरीटी परिघ आयुधः ॥३-३८-२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय