ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3838.16वाल्मीकि रामायण 38.16ततो अहम् मेघ संकाशः तप्त कांचन कुण्डलः । बली दत्त वरो दर्पात् आजगाम आश्रम अंतरम् ॥३-३८-१६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय