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वाल्मीकि रामायण 38.14

अजात व्यंजनः श्रीमान् बालः श्यामः शुभेक्षणः ।
एक वस्त्र धरो धन्वी शिखी कनक मालया ॥३-३८-१४॥

पूरा अध्याय