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वाल्मीकि रामायण 37.22

जीवितम् च सुखम् चैव राज्यम् चैव सुदुर्लभम् ।
यत् इच्छसि चिरम् भोक्तुम् मा कृथा राम विप्रियम् ॥३-३७-२२॥

पूरा अध्याय