ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3636.5वाल्मीकि रामायण 36.5चतुर्दश सहस्राणि रक्षसाम् भीम कर्मणाम् । शूराणाम् लब्ध लक्षाणाम् खर चित्त अनुवर्तिनाम् ॥३-३६-५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय