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वाल्मीकि रामायण 35.36

तम् महर्षि गणैः जुष्टम् सुपर्ण कृत लक्षणम् ।
नाम्ना सुभद्रम् न्यग्रोधम् ददर्श धनद अनुजः ॥३-३५-३६॥

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