ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3535.18वाल्मीकि रामायण 35.18हंस क्रौन्च प्लव आकीर्णम् सारसैः संप्रणादितम् । वैदूर्य प्रस्तरम् स्निग्धम् सांद्रम् सागर तेजसा ॥३-३५-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय