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वाल्मीकि रामायण 35.11

स शैलम् सागर अनूपम् वीर्यवान् अवलोकयन् ।
नाना पुष्प फलैर् वृक्षैर् अनुकीर्णम् सहस्रशः ॥३-३५-११॥

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